Hindi | Pans Labyrinth
सीमा भागी। उसकी माँ की तबीयत बिगड़ गई थी। प्रसव पीड़ा शुरू हो गई थी। रणवीर ने फैसला किया कि वह बच्चे को बचाएगा, माँ को नहीं। सीमा वापस भूलभुलैया में पहुँची। पैन ने उससे कहा, “एक रास्ता है। तुम अपनी माँ की जान ले सकती हो, और राजकुमारी बन सकती हो। या तुम इंसान रह सकती हो और अपने छोटे भाई को बचा सकती हो।”
“तुमने उसे मारा?” उसने गरज कर कहा।
उस रात, सीमा ने सपना देखा — वह राजकुमारी नावलि के महल में थी। पैन ने कहा, “तुमने मना कर दिया, और यही सबसे बड़ा जादू है। अब तुम हर उस बच्चे की राजकुमारी हो जो अंधेरे में अकेला है।”
लेकिन सीमा को किताबों की परियों की कहानियों में विश्वास था। खासकर उस कहानी में जो उसकी सगी दादी ने बताई थी— एक ऐसी भूलभुलैया जो जंगल के अंदर है, जहाँ एक राजकुमार सदियों से सो रहा है। एक शाम, सीमा किले के पीछे जंगल में भटक गई। उसने देखा—बबूल और बरगद के पेड़ों के बीच एक पुराना, टूटा-फूटा दरवाज़ा था। उस पर नक्काशी थी: चाँद, तारे, और एक मोर। pans labyrinth hindi
सीमा ने दरवाज़ा खोला तो उसके पीछे , न सिर्फ रास्तों की, बल्कि समय और यादों की। हर मोड़ पर उसे अपने बचपन की कोई खोई हुई बात दिखती—अपने असली पिता की मुस्कान, माँ का गाना, वह खिलौना जो उसने तोड़ दिया था।
“यह तुम्हें रास्ता दिखाएगी,” पैन ने कहा। रणवीर किले में लौटा। उसने देखा कि सीमा अपने नवजात भाई को गोद में लिए हुए है। माँ मर चुकी थी। रणवीर ने सीमा पर पिस्तौल तान दी।
उसने सीमा को एक साधारण सी चीज़ दी — , जिसके अंदर उसकी दादी की आत्मा बंद थी। “तुमने मना कर दिया
“मैं पैन हूँ,” उसने कहा। “तुम राजकुमारी नावलि हो। जब अत्याचारी लोगों ने स्वर्ग पर कब्ज़ा किया, तो तुम्हारे पिता ने तुम्हें इंसानी बच्ची बनाकर धरती पर भेज दिया। अब तुम्हें तीन काम करने हैं, ताकि तुम अपनी अमर आत्मा को वापस पा सको।” पहली परीक्षा – कीचड़ का राक्षस: सीमा को नीचे एक बेसमेंट में उतरना था, जहाँ एक बिना आँखों वाला राक्षस रहता था। उसके हाथों पर आँखें थीं। सीमा ने चुपके से उसकी आँखों पर गीली मिट्टी लगा दी, और जब राक्षस अंधा हो गया, तो वह तीन जादुई अमरूद ले आई।
रणवीर पागल हो गया। वह जंगल में भागा, और कभी वापस नहीं लौटा। सीमा अपने छोटे भाई को लेकर गाँव के एक मंदिर में पहुँची। उसने उस मिट्टी की गुड़िया को मंदिर के पीपल के पेड़ के नीचे दफन कर दिया।
पैन ने गहरी साँस ली। “तो फिर, मैं तुम्हें अमरता नहीं दे सकता। लेकिन शायद... अमरता हमेशा खून में नहीं होती।” न सिर्फ रास्तों की
भूलभुलैया के बीच में एक बूढ़ा आदमी बैठा था। उसका चेहरा हिरण की तरह था, और आँखों में चाँदनी थी।
सीमा ने कहा, “मैं राजकुमारी नहीं बनना चाहती। मैं बहन बनना चाहती हूँ।”
जब सीमा की आँख खुली, तो उसके भाई के हाथ में एक सुनहरा पर था — और भूलभुलैया का दरवाज़ा उसकी यादों में बंद हो गया। – “सच्ची अमरता वह नहीं जो तुम पाते हो, बल्कि वह जो तुम दूसरों के लिए बनाते हो।”
रणवीर को पता चल गया था। उसने सीमा को जंगल में घसीटते हुए पुकारा, “तू नक्सलियों से मिलती है, है ना?” उसने उसके हाथ से जादू की चॉक छीन ली, जिससे भूलभुलैया के दरवाजे खुलते थे।