The Reader In Hindi ★ Simple & Confirmed

उसका चेहरा पत्थर जैसा हो गया। उसने कहा, "मेरे लिए पढ़ना बंद करो। अब जाओ।"

मैं काँप रहा था। उसने बिना कुछ कहे मेरा हाथ पकड़ा और मुझे अपने कमरे तक ले गई। उसने गरम पानी गिराया, मुझे नहलाया, और मेरी उल्टी को साफ किया। उस रात मैं उसके बिस्तर पर सोया, उसके शरीर की गर्मी और लोहे जैसी महक से घिरा हुआ।

"क्या?" मैं हकलाया।

मैं पंद्रह साल का था जब मुझे पीलिया हो गया। सारा मोहल्ला उस बीमारी से काँप रहा था। स्कूल बंद थे, और मैं अपनी माँ की देखभाल में घर पर पड़ा था। एक दिन, जब उबासी लेते-लेते मेरी जान निकलने लगी, तो मैं बिना बताए घर से निकल भागा। The Reader In Hindi

लेकिन वह दिन बहुत दूर था। उस गर्मी में, मैं सिर्फ उसकी आवाज़ में डूबा एक लड़का था, जो हर शब्द को उसके लिए प्रेम में बदल देता था। यह अंश बर्नहार्ड श्लिंक के उपन्यास के मुख्य विषयों – पीढ़ीगत अपराधबोध, निरक्षरता का कलंक, और असंभव प्रेम – को हिंदी में ढालता है। माइकल बर्ग की नज़र से, हाना सिर्फ एक प्रेमिका नहीं, बल्कि जर्मन इतिहास का एक दर्दनाक प्रतीक बन जाती है।

मैं उसे 'हाना' कहता था। वह ट्राम में टिकट पंच करती थी। हर शाम मैं उसके पास जाता, नहाता, और फिर पढ़ता – 'ओडिसी', 'वॉर एंड पीस', 'द लेडी विद द डॉग'। वह एक साधारण अनपढ़ महिला लगती थी, लेकिन जब मैं पढ़ता, तो वह एक रानी बन जाती थी। वह हर पात्र के दर्द को अपने शरीर में समेट लेती थी।

अगले दिन मैं अपने पिता की शेल्फ से 'एमिलीया गालोटी' चुरा लाया। वह बैठी, मेज़ पर हाथ रखे, मेरी तरफ देखती रही। मैंने पढ़ना शुरू किया। आवाज़ें, संवाद, नाटक। वह सिर्फ सुनती थी। एक बार मैंने रुककर देखा – उसकी आँखों में पानी था। लेकिन उसने कभी किताब की तरफ नहीं देखा। कभी उँगली नहीं फिराई। निरक्षरता का कलंक

एक दिन मैंने पूछा, "हाना, तुम कभी खुद क्यों नहीं पढ़ती?"

"जो भी लाओ। कोई किताब।"

तब बारिश शुरू हुई। तेज, सर्द, पत्थर जैसी बूँदें। मैं एक बहुमंजिला इमारत के सीढ़ीदार दरवाजे के नीचे दुबक गया। अंदर गीली गंध थी, पुराने कपड़ों और मटमैली दीवारों की। तभी मैंने उसे देखा। वह सीढ़ियों से ऊपर उतर रही थी, हाथ में एक कोयला की बाल्टी लिए। और फिर पढ़ता – 'ओडिसी'

मैं नहीं जानता था कि उस रात मैंने एक रहस्य छेड़ दिया था – एक ऐसा रहस्य जो बीस साल बाद, एक कोर्टरूम में, मुझे उस महिला को एक यहूदी लेखक की किताब का हवाला देते हुए जेल भेजते हुए देखेगा। उस रहस्य का नाम था: । उस शर्म के लिए उसने अपनी आज़ादी कुर्बान कर दी, क्योंकि उसे यह बताने से बेहतर लगा कि उसने नाज़ी गार्ड के रूप में काम किया, बजाय इसके कि वह यह कहे कि वह 'पढ़ नहीं सकती'।

लेकिन असली चीज़ अगले दिन शुरू हुई।

उसने मुझे राहत के बजाय चिड़चिड़ी नज़रों से देखा। वह बत्तीस-छत्तीस की थी, भारी-भरकम शरीर वाली नहीं, बल्कि सुडौल और साफ़-सुथरी। उसका चेहरा जानवरों जैसा था – कोमल और खतरनाक दोनों। उसने कहा, "बीमार लड़के को घूमना नहीं चाहिए।"

जब मैं ठीक होकर उसे धन्यवाद देने गया, तो उसने सीधा सवाल किया: "पढ़कर सुनाओगे?"